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इस बीमारी को केवल आप घोषित करवा सकते हैं राष्ट्रीय कला!

Posted On: 29 Jul, 2015 हास्य व्यंग में

Mukesh Kumar

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थूकना कला है. एक ऐसी कला जिसने थूकने जैसी क्रिया को विविध आयाम दिये हैं. थूकना एक ऐसी कला है जिसमें लोग अपने मुँह से थूक, खैनी, पान आदि को विशिष्ट तरीके से जमीन और दीवार चटाते हैं. थूकने की क्रिया पेशेवरों के विभिन्न वर्गों में अंतर नहीं करती. मसलन आप मास्टर, हेडमास्टर, पोस्ट मास्टर, थानेदार, हवलदार, नेता और मंत्री तक को थूकते देख सकते है.



Spitting on Roads



बस तरीक़ा ही है जो थूकने वाले की क्लास बयाँ करती है. कोई पिच्च कर अपनी इस कला को व्यक्त करता है तो कोई पच्च कर. किसी के थूकने की आवाज़ में गहराई होती है. पिच्च, पच्च करने की नज़ाकत ही थूकने को कला साबित करती है. कला सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा माना जाता रहा है. इसलिये लोगों पर उसका गहरा असर होता है. थूकने का असर सड़कों और दीवारों पर होता है. धब्बा रहित बेदाग दिखती दीवारें और सड़कें थूक की मौजूदगी में चहक उठती है. अपनी लालिमा से पान की रक्तिम-सी पीक सादी और तंबाकू वाली थूकों पर अपना वर्चस्व कायम करने में सफल हो जाती है.


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थूकने की कला की नैसर्गिक सुंदरता को हर कोई देख सकता है और वो भी बिना किसी शुल्क का भुगतान किये. सड़कों पर गाड़ी की खिड़कियों से निकले नर मुंडों की थूक, आपके कदम रखने से पहले किसी के मुँह से निकल आपका रास्ता काटती थूक, सीढ़ियाँ चढ़ते दफ़्तर की दीवारों पर विभिन्न आकृतियाँ बनाती थूकों के दर्शन आपके मूड को बना-बिगाड़ सकती है. थूकों की भी आपसी प्रतिस्पर्धा होती है. खेल-खेल में छोटे अबोध बच्चे थूकने की कला में एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी हो जाते हैं. वो दूरी के आधार पर विजेता का निर्णय लेते हैं. जिसकी थूक जितनी दूर तक जाती है वो विजेता घोषित होता है.


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थूकने की लोकप्रियता का अंदाजा इस कला के कलाकारों की व्यापक पहुँच से है. जिस तरह ये घरों- गलियों की दीवारों से निकल रेलों, सरकारी दफ़्तरों की दीवारों तक पहुँची है और जिस तरह इस कला के कलाकार सामान्य से लेकर ऊँचे वर्गों तक पैठ जमाये हुए है वैसी व्यापकता कम कलाओं को ही मिलती है. इस तरह से थूकना उन सभी मानदंडों को पूरा करती है जिसकी जरूरत किसी कला को होती है. इसलिये थूकने को राष्ट्रीय कला घोषित कर देनी चाहिये.Next….


(इस व्यंग्य का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर थूकने वालों को अपनी आदत पर स्व-नियंत्रण के लिये प्रेरित करना है)


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