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जिसका करते हैं सब सम्मान उसे ही बना ली इस पुलिसवाले ने अपनी लुगाई

Posted On: 18 Jun, 2015 हास्य व्यंग में

Mukesh Kumar

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वर्षों से कहा जाता रहा कि घर की मुर्गी दाल बराबर होती है, पर आज तक मुर्गी और दाल को तौल कर किसी ने नहीं देखा. आँखों और कानों के आगे से गुजरने वाली इस पंक्ति को हजारों बार देखने-सुनने के बावजूद किसी को यह नहीं सूझी कि वह थोड़ा श्रम कर वस्तुस्थिति जानने की कोशिश करे. तस्वीर में दिख रहे इस पुलिसवाले की कहानी कुछ ऐसी ही है.


Kanoon ke rakhwale1



दरअसल जब धरती पर लोग राजा-महाराजा भैया के अत्याचारों से त्रस्त होने लगे तो उन्हें उन पर लगाम लगाने की आवश्यकता महसूस हुई. पर, शाही रूआब वाले बेलगाम राजाओं पर इतनी आसानी से लगाम नहीं लगायी जा सकती थी. सो, पब्लिक अपने-अपने दिमाग की नसों को बेलगाम दौड़ाने लगी. इस दौड़ में अंग्रेजी पब्लिक में से कुछ के दिमाग की नसें अवव्ल रहीं. पर, हर बार उनकी नसें किसी भौजी तक पहुँचती और फिर वापस आ जाती.


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बार-बार नसों के भौजी तक पहुँच वापस आ जाने पर लोगों ने निश्चय किया कि राजा भैया पर अंकुश लगाने के लिए भौजी को देस में लाया जाये. अपनी स्वच्छंता के खो जाने के भय से राजा स्वयं पर अंकुश लगाने वाली हर भौजी से चिढ़ता था. उसने ऐसी किसी भौजी के साथ शादी करने से मना कर दिया जिसकी बात मानने को उसे बाध्य होना पड़ता. पर, लोग अपने निश्चय पर अड़े रहे.


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आखिरकार, विवश होकर राजा को पब्लिक की बात मान भौजी को घर लाना पड़ा. घर आने के बाद हुआ वही जिसका अंदेशा राजा को था. भौजी ने सबसे पहला ऐलान यही किया कि राजा भी उसके दायरे से बाहर नहीं है. इसका राजा ने विरोध तो किया लेकिन देवरों की दिमाग की उपज दबंग भौजी के आगे राजा ने फिर घुटने टेक दिये. आठ सौ साल पहले इंग्लैंड में भौजी के आने का अनुकूल असर देश ही नहीं विदेशों पर भी पड़ा. सभी मैग्नाकार्टा जैसी भौजी लाना चाहते थे.


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पर, मैग्नाकार्टा जैसी और भौजी न होने के कारण दूसरे देशों में भौजियाँ उसका अनुकरण करने लगी. सरपंच संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा भी मैग्नाकार्टा भौजी से ही प्रेरित थी. 800 सालों के बाद भारत की धरती पर तस्वीर में दिख रहा यह वर्दीधारी वीर पैदा हुआ जिसने भारतीय कानून नामक भौजी को अपनी लुगाई बना साबित कर दिखाया कि “घर की मुर्गी दाल बराबर ही होती है.”Next…..


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