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2 इंच की दुनिया के कितने अफसाने!

Posted On: 30 Nov, 2013 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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दुनिया तो वही पुरानी है लेकिन इसके रंग बदलने लगे हैं. पुरानी धूल झाड़कर नए फसाने बनाने हैं. लेकिन कैसे?


भाई पहेली न समझना इसे, ‘तोप पर बारूद लगी हुई है’! बस आग लगने की देरी है. अभी आग लगी और अभी विस्फोट हुआ. लेकिन तोप का निशाना किस तरफ है यही कोई समझ नहीं पा रहा.. हम नहीं.. हम सब! पर हमारी गली में कुछ भी अनजाना नहीं. हमें सब पता है, हमारे लिए सब जाना पहचाना है.


Sheila dixitवह हमारी महारानी हैं न.. हां वही शील की धनी! ढिल्ली की पूंजी को अपनी पूंजी समझने वाली वृद्धा महिला! सुना है आजकल बड़ी डरी हुई हैं. क्यों? अरे भाई, क्या बताया ऊपर… ‘तोप पर बारूद लगी हुई है और तोप का निशाना ही नहीं पता…’. ऐसे में तो कोई भी डरेगा.. ये वृद्धा शील की धनी की क्या बिसात! उनके लिए डरने की एक और बात यह भी है कि तोप ठीक उनके शील महल के सामने है. सबको लग रहा है कि यह तोप इसी शील महल पर विस्फोट करने वाला है और शील महल इस विस्फोट में नेस्तनाबूद  हो जाएगा. हालांकि शील की धनी इस वृद्धा महिला ने विशेषज्ञों से कई टेस्ट करवाए और उन्होंने कहा भी कि इसमें उनका शील महल पूरी तरह सुरक्षित रहेगा लेकिन 10 मुंह, दस बातें. लोगों से किसी की खुशी देखी कहां जाती है. कहने वाले इसे वृद्ध महिला का भ्रम बता रहे हैं. उन्होंने अभी से ये कहना शुरू कर दिया है कि यह तोप वृद्ध महिला की आखिरी सांसों की उलटी गिनती है.


इसलिए आजकल यह आदरणीय वृद्ध महिला कितनी डरी हुई होंगी आप समझ सकते हैं. लोग तो यह तक कह रहे हैं तोप अपने शील महल पर न गिरे इसलिए ये दुश्मन से भी हाथ मिलाने को तैयार हैं. हालांकि वे अपना डर जाहिर नहीं कर रही हैं और बहुत निकट भविष्य में ही विस्फोट में शील महल के नेस्तनाबूद  होने की बात को पूरी तरह गलत बता रही हैं, लेकिन हमारी गली को खबर मिल ही गई कि यह शील की धनी वृद्ध महिला का अपना भय छुपाने की कोशिश भर है. वे अपने महल के साथ अपनी सांसों के टूटने के डर से डरी हुई हैं. आप कहेंगे कि इतनी जुगत लगाने से अच्छा है तोप को ही वहां से हटा दिया जाए. उसकी दिशा किसी बंजर की तरफ कर दी जाए. लेकिन यही तो परेशानी है कि तोप वहां से न हटाया जा सकता है, न उसे छूटने से रोका जा सकता है. उसका छूटना भी तय है वरना तहलका मच जाएगा. मुंबई वाला तहलका मत समझना.. दिल दहलाने वाले तहलके की बात हम कर रहे हैं.

चाहे रूठे ये जमाना, चाहे मारे जग ताना


दरअसल इस तोप को ढिल्ली वाले खुद ही लगाते हैं जब बहुत सालों बाद उनकी बिजली की वायरिंग खराब हो जाती है, छत से पानी चूने लगता है, घर के बाहर कचरों का ढ़ेर लग जाता है और बहुत सारी गंदगी जमा हो जाती है. तब ढिल्ली वाले घर की लिपाई पुताई कर उसे नया करते हैं. पुराने कचरों को फेंकते हैं और पूरी साफ-सफाई कर एक सुंदर-सलोना ढ़िल्ली बनाने की कोशिश करते हैं. शील की धनी इस वृद्ध महिला के घर से भी लोगों को बदबू सी आने लगी थी. सुनते हैं सबसे ज्यादा बदबू इसी घर से आती थी. इसलिए अफवाह ऐसी है कि ढ़िल्ली वालों ने इस बार इस तोप से इस वृद्ध महिला का शील घर उड़ा देने का मन बनाया है. इसी अफवाह से डरी-सहमी इस शील की धनी वृद्ध महिला आजकल भयभीत नजर आ रही हैं और अफवाह उड़ी कि उन्होंने दुश्मन से भी हाथ मिलाने का मन बना लिया है. खबरी ने एक बड़ा खराब काम किया और इसे पूरी ढिल्ली में फैला दिया. बेचारी ये वृद्ध महिला अब सबसे कहती फिर रही हैं कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका शील महल भी पूरी तरह सुरक्षित है. पर लोग इसे वृद्ध महिला की ‘प्राण जाए पर शान न जाए’ बनाए रखने की कोशिश मान रहे हैं या इनकी दिमागी दिवालियापन की निशानी जो सदमे से कभी कुछ, कभी कुछ कह रही हैं. अब हम भी क्या करें…बस इतना ही कह सकते हैं कि दुनिया में अफसानों की कमी नहीं..अब इस ढिल्ली पुरान को ही देख लें.. दो  इंच की दुनिया है और जाने कितने अफसाने हैं.

राजा खुश, युवराज खुश और प्रजा भी खुश

डूबते को मजबूत खंभे का सहारा चाहिए

अरविंद केजरीवाल, हर्षवर्धन या शीला दीक्षित?



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jiten के द्वारा
November 30, 2013

very impressive


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