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अरे भई बच्चा ही तो है बलात्कार कर दिया तो कौन सी आफत आ गई......

Posted On: 11 Apr, 2013 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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हम बेवजह पुलिस को क्रूर और अमानवीय करार देते हैं. अरे भई उनके अंदर भी दिल होता है जो मासूम को देखकर पसीजता भी है और उसे दुनिया वालों की बुरी नजर से बचाने का भरपूर प्रयास भी किया जाता है. अरे भई वे तो इतने दयालु हैं कि उन्हें तो इस बात से भी कोई अंतर नहीं पड़ता कि जिस बच्चे को उन्होंने बचाने जैसा सामाजिक कार्य किया है वह बलात्कारी है, उसने एक मासूम की जिन्दगी बर्बाद की है.


मरने के बाद उसका भूत मुख्यमंत्रियों की कुर्सी छीन लेता है


यूं तो हमारे देश की पुलिस अपराधियों को अपनी हिफाजत में रखने या उन्हें एक मजबूत सुरक्षा चक्र में रखने के लिए बहुत फेमस है लेकिन उत्तर प्रदेश की पुलिस के तो कहने ही क्या, उन्होंने तो जैसे कसम ही खा ली है.



यकीन नहीं होता तो चलिए हम आपको हालिया मामला सुनाते हैं जिसे पढ़ने के बाद आप जरूर उत्तर प्रदेश पुलिस की पीठ ठोकेंगे कि वह भले ही गुनहगारों को सजा दिलवा पाने में सक्षम ना हो लेकिन उन्हें बचाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ती.


दोस्त हुए पराए दुश्मन हुआ जमाना


नोएडा पुलिस से जुड़ा एक बड़ा ही दिलचस्प मामला सामने आया है. एक नौंवी कक्षा के छात्र पर एक लड़की के साथ बलात्कार करने का आरोप लगा लेकिन बस इस आधार पर कि वह नौंवी कक्षा का छात्र है उसे नाबालिग करार दे दिया गया. उसके साथ अपराधी की तरह नहीं बल्कि ऐसे बालक की तरह व्यवहार किया गया जिससे बचपने में बस एक छोटी सी भूल हो गई है. उसे हथकड़ी लगाकर पुलिस वैन में बंद किया गया लेकिन जब उस हथकड़ी के साथ उस अपराधी  की फोटो मीडिया के कैमरों में कैद हुई तब जाकर यह भेद खुला कि वह आरोपी भले ही इस समय नौंवी कक्षा में पढ़ रहा हो लेकिन बस इस आधार पर उसे नाबालिग करार तो बस उत्तर प्रदेश की पुलिस ही कर सकती थी.


दिल तो बच्चा है जी….लड़की को देखकर फिसल ही जाता है


देखिए उड़ गई ना खिल्ली, जो काम पुलिस ने अपनी मर्जी से नहीं किया वह काम मीडिया में खबर आने के बाद मजबूरन करना पड़ा. अरे भई पहले ये तो जान लेते कि वह पढ़ाई में कैसा है, पढ़ता-वढ़ता है कि नहीं, कितनी बार फेल हुआ है आदि आदि. मीडिया में जब उस अपराधी की तस्वीर आई तब सभी हैरान थे कि शारीरिक तौर पर पूर्ण विकसित इस बालक को नाबालिग करार कैसे दिया जा सकता है.


पेट की आग बुझाने आ गया है अखिलेश का लैपटॉप


मुए मीडिया वालों, जिन्होंने पुलिस का काम और बढ़ा दिया, को गालियां देते हुए पुलिस के सिपाहियों ने उस “नाबालिग” से पूछताछ शुरू की तब जाकर यह रहस्य खुला कि आखिर नौंवी कक्षा का छात्र इतना बड़ा कैसे दिख सकता है. अरे भई कॉमन सेंस की बात थी अगर कोई व्यक्ति बार-बार एक ही क्लास में फेल होगा तो इससे उसकी उम्र तो नहीं रुक जाएगी ना. अगर उम्र बढ़ेगी तो जाहिर सी बात है शारीरिक इच्छाएं भी बढ़ेंगी. शारीरिक इच्छाएं बढ़ेंगी तो वह अपनी इन अनैतिक इच्छाओं को पूरा करने के लिए किसी मासूम को अपना शिकार बनाने से भी नहीं चूकेगा.



लेकिन कौन इतनी सिरदर्दी मोल लेता, कौन एक “आम” सी लड़की के दोषी को सजा दिलवाने की कोशिश करता. कौन उस आरोपी से पूछताछ करता, बस एक सवाल पूछ लिया कौनसी क्लास में हो, जिम्मेदारी समाप्त. अरे भई आम का मतलब नहीं जानते आम मतलब जो एक जैसे हजार मिलते हैं. अगर एक के साथ कुछ गलत हो गया तो क्या हुआ उसके जैसी और भी तो हैं, किसको क्या फर्क पड़ता है.


क्या इन्हें मिलेगी सजा !!

दोस्त हुए पराए दुश्मन हुआ जमाना

सांसदों को हिरोइन और क्रिकेटर की तो कद्र ही नहीं है


Tags: uttar pradesh police, uttar pradesh government, rape, sexual offences, उत्तर प्रदेश पुलिस, बलात्कार, रेप, शारीरिक इच्छाएं, यौन अपराध, crime capital




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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashokkumardubey के द्वारा
April 20, 2013

अपने देश की पुलिस अपराधियों को तो सुरक्षा देती है और आम जनता एवं पीड़ित को दुत्कार क्यूंकि जो अपराधी होगा वाही तो पुलिस डंडे से बचे रहने के लिए उनकी खातिर तवज्जो करेगा आम आदमी तो वैसे भी पुलिस से घबराता रहता है न जाने कौन सी दफा में पुलिस उनको अन्दर कर दे ये दफा भी कई दफा बड़ी सर दर्दी का सबब बनती है जिसपर पड़ती है वाही जनता वो कहते है न “वो क्या जाने पेड परायी, जिनके पैर न फटे बेवाई “


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