blogid : 12847 postid : 93

बाजारू मीडिया का बाजारवाद

  • SocialTwist Tell-a-Friend

कौन सा मुद्दा जरूरी है, किस पर यहां टीआरपी बटोरी जा सकती है और कौन सी खबर आपको टी.वी. पर अड़े रहने पर मजबूर कर देगी यह आज का सबसे बड़ा बाजारवाद है और इन सारे पैंतरों को आज की मीडिया बखूबी जानती है. जिस प्रकार की पत्रकारिता आज भारत जैसे विकासशील देश में हो रही है उसको देखते हुए इसके भविष्य के बारे में आसानी से अन्दाजा लगाया जा सकता है. जहां पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य जनता और सत्ता पक्ष के बीच बढ़ती दूरी को मिटाना होना चाहिए वहीं इसका मुख्य कार्य अब जनता को ऐसी खबरें दिखा कर गुमराह करना रह गया है जो रोचक हों और जिस पर आम जनता आसानी से और देर तक अपना समय बिता सके.


Read:कानून का मजाक बना दिया इस नाबालिग ने


क्या-क्या दिखाया जा सकता है

इस बाजारवाद के जमाने में इस बात पर भी गौर किया जाना चाहिए कि किस प्रकार की खबर से जनता और टीवी देखने वालों को रिझाया जा सकता है. इसके लिए खास तौर से उस प्रकार की खबरें निकाली जाती हैं जिससे लोग आकर्षित हों, भले ही वो किसी समुदाय और किसी घटना की व्याख्या न भी करती हों. अब मीडिया से आपको चिंतन का समय बहुत ही कम मामलों में मिल सकता है. अब तो यह मनोरंजन का साधन बनता जा रहा है. जिसमें सास-बहू धारावहिक की झलकियां दिखाई जाती हैं. खबर और चिंतन के नाम पर शून्यता पैदा करती आज की पत्रकारिता भले ही खुद जनता के हितों को साधने की बात करती हो पर अगर जमीनी स्तर पर देखा जाए तो यह कहा जा सकता है कि इस तरह के उपाय करने में वह पूरी तरह से सफल नहीं दिख रही है. आज की मीडिया के लिए आईपीएल की खबरें बड़ी हो सकती हैं पर दिल्ली और पूरे देश में पिछले कुछ वर्षों में हजारों बच्चे गायब हो गए यह यहां के लिए कुछ ज्यादा महत्वपूर्ण खबर नहीं है. उसके लिए पेज 3 की खबरें महत्वपूर्ण हैं पर सरकारी आंकलन के अनुसार 32 रुपए में अपना घर चलाने वालों की खबरें उसके लिए कोई मायने नहीं रखतीं.


Read:ये क्या कह दिया मंत्री जी आपने!!


अपनी विकास गति तेज रखनी है

अपनी विकास गति तेज रखनी है भले ही देश के प्रति अपने कर्तव्य का पालन हो या नहीं. किसी के बयान को इस प्रकार जनता के सामने प्रस्तुत करना कि वो उसके नकारात्मक पक्ष को ही सही मान ले यह किस प्रकार की पत्रकारिता है? आपका काम है सच को सामने लाना और आप उसमें अक्षम दिखाई देते हैं. भले ही कुछ पत्रकार स्वतंत्र हृदय से मुद्दे की वकालत करते रहे हैं पर उनकी तादाद बहुत ही कम है जिससे व्यवस्था में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है. भारत के इस कटु राजनैतिक माहौल में जहां हर समय जनता के हितों को दबाया जाता है उस स्थिति में मीडिया का यह रुख भारत के भविष्य को अंधकार में ले जाने के सिवा और कुछ नहीं कर सकता है. खबरों के माध्यम से असली चेहरे को बाहर ना निकाल पाना भी आज की मीडिया का एक कमजोर पक्ष है जो इस बात को जाहिर करता है कि सिर्फ हितैषी का नाम जपने से ही कुछ नहीं हो जाता है जब तक आप खुद को उस तथ्य से रूबरू नहीं करते हैं.


अगर आप किसी भी देश या खास कर भारत जैसे देश में रहते हैं जहां मीडिया को इतनी छूट मिली हुई है और जहां इसे देश का चौथा स्तम्भ भी माना जाता है तो आप यह अच्छी तरह समझ सकते हैं कि इसके ऊपर कितनी बड़ी जिम्मेदारी है और उसे निभाने में यह कितना असमर्थ है.


Read More:

क्या बुराई है पोर्न फिल्में देखने में?

डिस्को में कैंडल मार्च!!

सदन है या अखाड़ा !!


Tags:Media, Indian Media, Media and Politics, Market Oriented News,  TRP, News, News Channel TRP, India, भारत, मीडिया, राजनीति और मीडिया, न्यूज चैनल, भारतीय मीडिया, बाजार

Post Your Comment:



Tags:                             

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

सारांश के द्वारा
February 18, 2013

देश की हालत बदलने के लिए मीडिया को अपनी अहम भूमिका अदा करनी चाहिए.


topic of the week



latest from jagran