blogid : 12847 postid : 86

अब तो शर्म कर लीजिए

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अभी भी शायद बातचीत से कोई रास्ता निकल जाए इसी आशा में भारत लगा हुआ है. पाकिस्तान द्वारा किए गए इतने बर्बर व्यवहार के बाद भी उससे यह आस लगा बैठना कि वो बात कर मामले को सुधार लेगा क्या यह उम्मीद बेकार नहीं लगती है? जिस प्रकार से पाकिस्तान बार-बार अपने किए किए गए वायदे से पीछे हट रहा है उसको देख कर यह मानना बहुत मुश्किल है कि शांति बनाए रखने के मामले में वह भारत का साथ देगा. अपनी आदत से मजबूर पाकिस्तान शांति के क्षेत्र में कोई कार्यवाही करना ही नहीं चाहता है. कुछ दिन पहले हुई घटना के बाद भी इस तरह की आशा रखना बेकार ही सबित होगा.


Read:39 साल से !!!! जिंदा लाश बन गई है वो



अब तो आप पर भी विश्वास नहीं रहा: इस तरह की घटनाएं जो बार-बार हो रही हैं क्या उन पर उतना ध्यान न देकर कोई देश की राजनीति और यहां के राजनेता पर विश्वास कर सकता है? यहां के लोगों की यह अवस्था है जो कुछ कर नहीं सकते हैं और किसी ना किसी रूप में अपने बच्चों को गोली का शिकार होते देखते रहते हैं. अपनी आंखों के सामने इन बर्बादियों का मंजर किसको अच्छा लगता होगा? अपने ओज का परित्याग कर चुके भारतीय राजनीति से क्या यह उम्मीद की जा सकती है कि वो आने वाले समय में देशवासियों की रक्षा आतंकवाद से कर सकेगी? कोई आपके घर में घुस कर आपको मार कर चला जाता है और आप इस बात पर आश्वस्त रहते हैं कि हम बात कर पूरे मामले को सुलझा लेंगे. अपनी जुबान दे कर फिर वही करने वालों की बात पर विश्वास करना शायद भारत की सबसे बड़ी मूर्खता होगी जिसका खामियाजा उसे भविष्य में बड़े पैमाने पर चुकाना पड़ सकता है.



Read:महिलाओं के टिप्स: यह एप्स कर सकते हैं आपकी रक्षा



नए हमले नए आयाम: यह पहली बार नहीं है जब भारत पर पाकिस्तान ने हमला किया है. अब तो शायद इसकी आदत पड़ चुकी है या यहां के राजनेताओं ने इसकी आदत लगा दी है इसलिए अब यह कुछ अलग और बड़ा नहीं लगता है. फिर एक कसक जरूर उठती है दिल में जो नस-नस में बदला लेने की बात के साथ-साथ अपनी सियासत के खिलाफ एक प्रबल आवाज उठाने का प्रयास करती है. एक बार वह समय फिर से दस्तक देने को खड़ा है जब भारत पर लगे घावों का हिसाब किया जा सके. क्या हम इस बार यह उम्मीद कर सकते हैं कि उनके साथ न्याय होगा जिनसे दहशत और हैवानियत की वजह से जीने का हक छीन लिया गया, जिनके परिवारवाले आज भी क्रंदन कर रहे हैं. इस प्रकार की संवेदनहीनता को कैसे और कब तक बर्दाश्त करना होगा इसका कोई लेखा-जोखा नहीं है और ना ही कोई कभी इस सियासत से यह उम्मीद कर सकता है.



Read:मेरे साथ बलात्कार होने के लिए ‘मैं ही दोषी क्यों’ ?


हार ना मानें!!: इतने बड़े मामले में भी अभी तक कोई खास कार्यवाही नहीं हुई है और यह एक चिंता का कारण है. वार्ताओं का दौर ना जाने कब से चलता जा रहा है और ना जाने कब तक इसका क्रम ऐसे ही जारी रहेगा. परिवर्तन के नाम पर आश्वासन की झिड़की कब तक और सुनने को मिलेगी? ऐसे सवाल पूछना शायद एक रीति बन चुकी है और बड़े पैमाने पर कोई खास प्रभाव यह नहीं पैदा कर पाते हैं. ज्यादा से ज्यादा सरकार और क्या सोच सकती है उसकी सोच हर्जाने के ऊपर तो जा नहीं सकती है. अब तो कुछ करना ही चाहिए, मात्र कसाब को फांसी देकर चुनाव के समय अपनी स्थिति को गरमाने से क्या मिलेगा? एक बार उनके चेहरे को भी देख लेना आवश्यक है जिनके परिजनों के मरने का हर्जाना मात्र देकर मुंह पर ताला ठोक दिया गया है. क्या एक मानवीय जान की तुलना मात्र हर्जाने से की जा सकती है?



Read More:

अब पुलिस खुद कठघरे में है

Gadgets of 2013: इस नए साल होगा जरूर कुछ खास

क्या फिर से जिंदा हो जाएंगे ‘किशोर दा’ !!


Tags:India , Pakistan,  India Pakistan, India, Home Minister, Pakistan Home Minister, रहमान मलिक,  भारत, पकिस्तान, भारत पाकिस्तान, Kasab , Kasab Hanging, Afzal guru, Pakistan Attack on India



Tags:                           

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

3 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

AMIT KUMAR MITTAL के द्वारा
January 11, 2013

ऐसे में रहीम दस जी का दोहा याद आता है – रहिमन बिगड़े दूध का मथे न माखन होए. दरअसल पाकिस्तान के जिद्दी स्वाभाव के कारण उसके साथ रिश्ते मधुर होते नहीं दिख रहे है.

सारांश के द्वारा
January 11, 2013

ना जाने कब तक इसका क्रम ऐसे ही जारी रहेगा. देश की हालत कब बदलेगी

कुणाल के द्वारा
January 11, 2013

इस मुद्दे पर विचार होना आवश्यक है.


topic of the week



latest from jagran